Tuesday, 16 August 2016

जिज्ञासा समाधान

                                                                 श्री कृष्ण कृपा 
                                                              जिज्ञासा समाधान 
जिज्ञासा - अवतार मथुरा में हुआ लेकिन रातों-रात पहुंचे गोकुल, बधाई गोकुल में बजी -इसका तात्विक भाव क्या है ?

समाधान - इस का एक पक्ष तो यह है की श्री कृष्ण जन्म कोई सामान्य घटना तो नहीं है, न ही यह सामान्य मनुष्यों की भांती जन्म की स्थिति है "कृष्णस्तु भगवान स्वयम" का भाव यहाँ पूरी तरह स्पष्ट हो रहा है अर्धरात्रि में जन्म, कुछ ही समय में वासुदेव-देवकी की हथकड़ी - बेेड़ियां खुल जाना पहरेदारो का का सो जाना ,जेल के बंद द्वार अपने आप खुल जाना तथा वासुदेव जी का बाल कृष्ण को ले कर बहार निकल जाना -क्या कम महत्व की घटना है यही नही ,यमुना जी का प्रारम्भ में उफ्लान लेना स्पर्श मिलने के बाद बस मार्ग दे देना ,वासुदेव जी का सकुशल गोकुल पहुचँ जाना कन्हैया को नन्द यशोदा के वहाँ छोड़ कन्या रूप में योग माया को लेकर रातो रात लौटना फिर से जेल के द्वार बंद होना ,तब पहरेदारो का जागना -सीचो क्या सिध्द करता है
बहुत स्पष्ट सन्देत -संदेश -यह कोई सामान्य जन्म नही "जन्म कर्म च में दिव्यम "(गीता ४/९)
सामान्य लीला की स्थिति यह की कंस के चुंगुल से रातो रत निकलना आवश्यक था ,कन्हैया को गोकुल छोड़ना तथा कंस  को स्पष्ट सन्देश देने हेतु योग माया को 'यहाँ लाना था ,लेकिन महापुरुष इसका तात्विक भाव यह भी लेते है की 'गो ' नाम है इंद्रियों का ,कुल समूह भगवान सब के भीतर है ,पर कही न कही परिस्थितियों ,व्रतियों की जेल साथ है  हर इंद्रिय में  व्यवहारिक धरातल पर उनके का प्रभाव राम जाये तब जीवन में पूर्ण आनंद की स्थिति  बनजाती है एवम यही वास्तविक बधाई का भाव है
                                                 


जय श्री कृष्ण 














Thursday, 11 August 2016

जिज्ञासा समाधान

                                                                     श्री कृष्ण कृपा                                               

                                                                जिज्ञासा समाधान                            
                                                                                                           
जिज्ञासा - श्री कृष्ण जन्माष्ठमी  पर्व अपने  आप में एक रहस्य सा लगता है ? मथुरा की कारागार में अर्ध रात्रि के समय भगवान कृष्ण का जन्म लेना क्या सिध्द करता है ?



समाधान -   सच तो हैं भगवान श्री कृष्ण का केवल जन्म ही रहस्य नही, उन का सम्पूर्ण जीवन अपने आप में एक रहस्य  हैश्री कृष्ण अपने आप में एक चिंतन अपितु सम्पूर्ण दर्शन है ,बध्द  रूप में तो स्पस्ट  इतनी सी बात है ,की कंस ने जब आकाशवाणी सुनी की देवकी -वासुदेव ला आठवाँ बालकउसका कल बने गया ,उसने वासुदेव -देवकी दोनों को कारागार में दाल दिया हाथो पावो में हथकड़ी -बेड़िया दाल दी , स्वाभाविक है की जन्म जेल में ही होता ,विचार से तो इस के पीछे गहरी प्रेरणा छिपी है ,मनुष्य मात्र कही -न -कही किसी -न-किसी रूप में वृत्तियो,परिस्थितियों ,कर्म बंधन की जेल में कैद है जैसे वासुदेव -देवकी  की हथकड़ी ,बेड़ियो के बंधन  कन्हैया के जन्म लेते ही खुल गए ,यह संकेत है की हे मानव यदि बंधन मुक्त जीवन चाहते हो तो भगवान का अवतार अपने जीवन में होने दो !यदि भगवान साथ नही तो जीवन में बंधन बने रहे गए !उन्हें जीवन में लाओ ,अपना साथी बनाओ ! उनके आने से ही अज्ञानता जनित अंधकार मिटेगा ,जीवन में ज्ञान का प्रकाश होगा !