श्री कृष्ण कृपा
जिज्ञासा समाधान
जिज्ञासा - अवतार मथुरा में हुआ लेकिन रातों-रात पहुंचे गोकुल, बधाई गोकुल में बजी -इसका तात्विक भाव क्या है ?
समाधान - इस का एक पक्ष तो यह है की श्री कृष्ण जन्म कोई सामान्य घटना तो नहीं है, न ही यह सामान्य मनुष्यों की भांती जन्म की स्थिति है "कृष्णस्तु भगवान स्वयम" का भाव यहाँ पूरी तरह स्पष्ट हो रहा है अर्धरात्रि में जन्म, कुछ ही समय में वासुदेव-देवकी की हथकड़ी - बेेड़ियां खुल जाना पहरेदारो का का सो जाना ,जेल के बंद द्वार अपने आप खुल जाना तथा वासुदेव जी का बाल कृष्ण को ले कर बहार निकल जाना -क्या कम महत्व की घटना है यही नही ,यमुना जी का प्रारम्भ में उफ्लान लेना स्पर्श मिलने के बाद बस मार्ग दे देना ,वासुदेव जी का सकुशल गोकुल पहुचँ जाना कन्हैया को नन्द यशोदा के वहाँ छोड़ कन्या रूप में योग माया को लेकर रातो रात लौटना फिर से जेल के द्वार बंद होना ,तब पहरेदारो का जागना -सीचो क्या सिध्द करता है
जिज्ञासा समाधान
जिज्ञासा - अवतार मथुरा में हुआ लेकिन रातों-रात पहुंचे गोकुल, बधाई गोकुल में बजी -इसका तात्विक भाव क्या है ?
समाधान - इस का एक पक्ष तो यह है की श्री कृष्ण जन्म कोई सामान्य घटना तो नहीं है, न ही यह सामान्य मनुष्यों की भांती जन्म की स्थिति है "कृष्णस्तु भगवान स्वयम" का भाव यहाँ पूरी तरह स्पष्ट हो रहा है अर्धरात्रि में जन्म, कुछ ही समय में वासुदेव-देवकी की हथकड़ी - बेेड़ियां खुल जाना पहरेदारो का का सो जाना ,जेल के बंद द्वार अपने आप खुल जाना तथा वासुदेव जी का बाल कृष्ण को ले कर बहार निकल जाना -क्या कम महत्व की घटना है यही नही ,यमुना जी का प्रारम्भ में उफ्लान लेना स्पर्श मिलने के बाद बस मार्ग दे देना ,वासुदेव जी का सकुशल गोकुल पहुचँ जाना कन्हैया को नन्द यशोदा के वहाँ छोड़ कन्या रूप में योग माया को लेकर रातो रात लौटना फिर से जेल के द्वार बंद होना ,तब पहरेदारो का जागना -सीचो क्या सिध्द करता है
बहुत स्पष्ट सन्देत -संदेश -यह कोई सामान्य जन्म नही "जन्म कर्म च में दिव्यम "(गीता ४/९)
सामान्य लीला की स्थिति यह की कंस के चुंगुल से रातो रत निकलना आवश्यक था ,कन्हैया को गोकुल छोड़ना तथा कंस को स्पष्ट सन्देश देने हेतु योग माया को 'यहाँ लाना था ,लेकिन महापुरुष इसका तात्विक भाव यह भी लेते है की 'गो ' नाम है इंद्रियों का ,कुल समूह भगवान सब के भीतर है ,पर कही न कही परिस्थितियों ,व्रतियों की जेल साथ है हर इंद्रिय में व्यवहारिक धरातल पर उनके का प्रभाव राम जाये तब जीवन में पूर्ण आनंद की स्थिति बनजाती है एवम यही वास्तविक बधाई का भाव है
जय श्री कृष्ण
सामान्य लीला की स्थिति यह की कंस के चुंगुल से रातो रत निकलना आवश्यक था ,कन्हैया को गोकुल छोड़ना तथा कंस को स्पष्ट सन्देश देने हेतु योग माया को 'यहाँ लाना था ,लेकिन महापुरुष इसका तात्विक भाव यह भी लेते है की 'गो ' नाम है इंद्रियों का ,कुल समूह भगवान सब के भीतर है ,पर कही न कही परिस्थितियों ,व्रतियों की जेल साथ है हर इंद्रिय में व्यवहारिक धरातल पर उनके का प्रभाव राम जाये तब जीवन में पूर्ण आनंद की स्थिति बनजाती है एवम यही वास्तविक बधाई का भाव है
जय श्री कृष्ण